Aisi Akshare - ऐसी अक्षरे
A blog by Mandar Shinde 9822401246
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Saturday, July 30, 2011
आरसा
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चढवितोस आठी अपुल्या कपाळी पाहूनी आरशात जेव्हा तू स्वतःला, बसविलाच नाही आरसा म्हणूनी देतो धन्यवाद तेव्हा मी स्वतःला.
1 comment:
Monday, July 25, 2011
इन्साफ
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इन्साफ़ क्या माँगते हो तुम उस ख़ुदा से, जो खुद इन्सान की बनाई कहानीयों में उलझ गया...
साहिर आणि जादू
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(' नया ज्ञानोदय ' या हिंदी मासिकासाठी गुलजार , ' मेरे अपने ' नावाचा स्तंभ लिहितात . जानेवारी २०११ च्या अंकात त्यांनी साहिर...
Friday, July 22, 2011
दिल-जले...
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हमें बेदिल कहनेवाले जरा इतना बता दे जाते-जाते.. तेरी राहों में रोशनी के लिये जिसे जलाया, वो क्या था?
Tuesday, July 19, 2011
तो ज़िंदा हो तुम...
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दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम नज़र में ख़्वाबों की बिजलीयाँ लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम हवा के झोंकों के ...
अपने होने पर मुझको यकीं आ गया...
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पिघले नीलम सा बेहता यह समा, नीली नीली सी खामोशियाँ, ना कहीं है ज़मीं ना कहीं है आसमाँ, सरसराती हुई टेहनियाँ पत्तियाँ, कह रही है बस एक तुम हो...
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है...
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जब जब दर्द का बादल छाया जब घूम के साया लेहराया जब आँसू पलकों तक आया जब यह तनहा दिल घबराया हमने दिल को यह समझाया दिल आखिर तू क्यूँ रोता है दु...
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