Monday, June 6, 2016

चाँदनीयाँ


तुझ बिन सूरज में आग नहीं रे
तुझ बिन कोयल में राग नहीं रे
चाँदनीयाँ तो बरसे
फिर क्यूँ मेरे हाथ अंधेरे लगदे ने

तुझ बिन फागुन में फाग नहीं रे
तुझ बिन जागे भी जाग नहीं रे
तेरे बिना.. ओ माहिया
दिन दरिया, रैन जझीरे लगदे ने

- अमिताभ भट्टाचार्य, टू स्टेट्स

No comments:

Post a Comment