ऐसी अक्षरे

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मंदार शिंदे
Mandar Shinde

Wednesday, August 3, 2011

दिल तोड़ दिया

कुछ तो दुनिया कि इनायात ने दिल तोड़ दिया
और कुछ तल्ख़ी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया
हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब
आयी बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया

- सुदर्शन फ़ाकिर
(इनायात = एहसान; तल्ख़ी = कटुता)

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Monday, August 1, 2011

कायमचे धडधडणारे मन...

कायमचे धडधडणारे मन शांत करावे क्षणभर कोणी
जहरामधले जहरीलेपण कमी करावे क्षणभर कोणी
एक एक एकटेपणाच्या लाटा मजवर करती हल्ला
चंद्रकिनारी चंद्रकमानी मधून यावे क्षणभर कोणी

- उषाकुमारी

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दुवायें

वो पूछते हैं, हजारों दुवाओं से क्या हुआ हासिल?
अरे, हासिल तो तुम हो, ना खोने के वास्ते हैं दुवायें...

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