ऐसी अक्षरे

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मंदार शिंदे
Mandar Shinde

Monday, November 12, 2012

गुँचा कोई मेरे नाम कर दिया...

गुँचा कोई मेरे नाम कर दिया
साकी ने फिर से मेरा जाम भर दिया

तुम जैसा कोई नहीं इस जहाँ में
सुबह को तेरी जुल्फ ने शाम कर दिया

मेहफिल में बार-बार इधर देखा किये
आँखों के जझीरों को मेरे नाम कर दिया

होश बेखबर से हुये उनके बगैर
वो जो हमसे केह ना सके, दिलने केह दिया

(गुँचा = कळी; जझीरा = बेट)

- रॉकी खन्ना / मोहित चौहान

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