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मंदार शिंदे
Mandar Shinde

Sunday, May 31, 2015

पल दो पल का साथ हमारा...

नजरों के शोख नजारे, होठों के गर्म पैमाने
हैं आज अपनी मेहफिल में, कल क्या हो कोई क्या जाने
ये पल खुशी की जन्नत है, इस पल में जी ले दीवाने
आज की खुशियाँ एक हकीकत, कल की खुशियाँ अफसाने हैं...
पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं
इस मंजिल पे मिलने वाले, उस मंजिल पर खो जाने हैं...

- साहिर लुधियानवी यांच्या गाजलेल्या गीतांपैकी एक. वर्ष - १९८०, चित्रपट - द बर्निंग ट्रेन. १९८० याच वर्षी, हे गीत लिहिणारे साहिर आणि हे गीत गाणारे मोहम्मद रफी हे दोघेही... 'इस मंजिल पे मिलने वाले, उस मंजिल पर खो गये...'


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